पल्स पोलियो अभियान की,
लम्बी है बडी कहानी ।
रविवार की छुट्टी के दिन,
मास्टर मांगे पानी ।।
आंगनबाडी,सहायिका,
ए एन एम और आशा ।
खुसुर फुसुर सब करती हैं,
देख मास्टर की निराशा ।।
दिन दिन भर आठ से पांच,
मास्टर होवे लासा ।
गांव से बच्चे लाने खातिर,
लडे बहुएं आशा ।।
ऊपर से नीचे तक सबका,
गिन गिन पैसा आता ।
एक अकेला मास्टर जो,
फूटी कौडी न पाता ।।
मच्छर मारे मक्खी मारे,
और पोलियो मारा ।
मारामारी की महामारी में,
खुद पोलियो का मारा ।।
भूला नही है यही दिवस है,
भाटपार का शिक्षक संघ ।
सत्ताइस सस्पेंड हुए थे,
देखके सब रह गये थे दंग ।।
घरवाले भी डांट पिलाते,
चैन कभी न देते हो !
गणना और बूथ के भूत में,
हमे लपेटे रहते हो !!
सीएम भी बेरुखी दिखाते,
अभियान की गाथा मे ।
बहुत हो गया बन्द करो अब,
दर्द हो गया माथा में ।।
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