1-
जिनको खोज रहे हो 'वेद' ,
वो यहीं तुम्हारे पास हैं ।
विविध विधा मे पारंगत ,
सब काव्यता के दास हैं ।
'शब्दों के सौदागर' बसते यहां,
यह बस्ती ही कुछ खास है ।
अचरज है जल में रहके भी,
मछली को प्यास है ।।
2-
ऐ 'शब्दों के सौदागर'
गर सौदा है मंजूर तुझे ;
कर सौदा दास हूं मै ,
नहीं शब्दों का आभास मुझे ।
शब्दकोष के शब्द से वंचित अपवंचित चितचोर नहीं ;
है मंजूर मुझे भी पर ,
निःशब्द मै , शब्दसराबोर नही ।।
"वेद"
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