।। अथ शिक्षामित्र-व्यथा कथा ।।
सुनो मानवों गहन मनन से,
कहता अपनी कहानी हूं ।
इसी धरती के भारत देश का,
मै भी एक प्राणी हूं ।।
उत्तर प्रदेश के गांव-गांव मे,
सहज ही पाया जाता हूं ।
स्कूल मे शिक्षणरत हां मै,
शिक्षामित्र कहलाता हूं ।।
चौदह साल व्यतीत किए ज्यों,
राम ने काटा था वनवास ।
मैने भी इतने वर्षों तक,
सेवा दी लेकर इक
आस ।।
अल्प मानदेय पाकर भी,
मनोयोग से शिक्षण कार्य किया ।
गणना,चुनाव,पल्स पोलियो,
आदि सभी मे प्रतिभाग लिया ।।
कर्मों मे मेरे इतने बरस,
नहीं खोट किसी ने निकाला था ।
आना जाना समय से था,
स्कूल का खोलता ताला था ।।
प्रशिक्षण देकर सत्ता ने,
जब सहायक अध्यापक बना दिया ।
बरसों से मेरी मांग थी जो,
उसे पूरा करके गिना दिया ।।
अब मेरे दुर्दिन दूर हुए,
घर खुशियों का त्यौहार मना ।
चहुं ओर मिठाई बांटी थी,
घर मे उमंग का वास बना ।।
मै भी खुश बच्चे भी खुश,
पितुमात न फूले समाए थे ।
जो बन्धु दूर हो गए थे हमसे,
वो भी करीब अब आए थे ।।
सुखमय जीवन चलने लगा,
पर यह विधि को मंजूर न था ।
बेखबर था कि नजर लगेगी,
कोर्ट का फैसला दूर न था ।।
समायोजन रद्द किया कोर्ट ने,
सपने सब चकनाचूर किए ।
भूचाल आ गया जीवन मे ,
आघात हृदय मे भरपूर दिए ।।
मेरा तो चमन उजड गया,
वीरान हो गया जीवन था ।
काठ कलेजा हो गया,
टूट चुका सबका मन था ।।
परलोक सिधारे कुछ साथी,
बीमार हुए,सब हताश हुए ।
शेष बचे जो तिल-तिल वो ,
मरने को जिन्दा लाश हुए ।।
रुको साथियों यूं न जाओ ,
पीछे घर-परिवार तुम्हारा ।
सोचो जरा तो बीबी बच्चों का ,
कौन बनेगा इनका सहारा ?
माना कि दूर दूर तलक,
गहन अंधेरा छाया है ।
कहीं धूप कहीं पर छाया है ,
सब यही प्रभु की माया है ।।
वह जीवन ही क्या जीवन है ,
जिसमे संघर्ष का मेल न हो ।
उठो,लडो,मत झुको साथियों !
भले चाहे क्यों जेल न हो ।।
ललकार उठो शंखनाद करो ,
सुने सत्ता अखिल प्रदेश की ।
पोंछ के आंसू करो चढाई ,
हिल उठे गद्दी भी देश की ।।
नही चाहिए महल अटारी ,
जीने का अधिकार ही दे डालो ।
या तो जिला दो महामहिम ,
या इच्छामृत्यु ही दे डालो ।।
उत्तम प्रदेश कहने वालों !
क्यों मुझको गिरा दिया तम मे ?
सोची समझी चाल थी क्या ?
जो डुबो दिया मुझको गम मे ।।
विधिवेत्ता की कमी थी क्या ?
या खोट तुम्हारे एतबार मे ?
अनगिनत छेद कर डाले नाव मे ,
डुबो दिया मंझधार में ।।
टीईटी,बीटीसी वालों !
बिगाडा मैने क्या तुम्हारा था ?
नहीं रहा जो मेरा बन्धु भी ,
किसी की आंख का तारा था ।।
चिता जलाकर क्या उस पर ,
रोटी सेंककर खाओगे ?
इंसानियत नही रही क्या ?
जो मातम पर जश्न मनाओगे !!
जियो और जीने दो क्या ?
यह तुम पाठ भूल गए ?
मुझे मारकर करोगे सेवा ,
मानवता के प्रतिकूल गए !!
नही मरेंगे,जियेंगे अब,
यही "वेद"हमारा प्रण होगा ।
सत्ता के प्रतिष्ठान सुनो,
याचना नहीं अब रण होगा ।।
समर्थन----
भाटपार का शिक्षक संघ ,
हर कदम पर साथ रहेगा ।
प्रदेश व जिला इकाई "वेद" ,
पूर्ण समर्थन करेगा ।।
वादा है साथ निभाएंगे,
इरादे हमारे नेक हैं ।
जय शिक्षक-
जय शिक्षामित्र !
आवाज दो हम एक हैं ।।
आपके विचारों की प्रतीक्षा मे "वेद"